ओपिनियन

राजनैतिक शुचिता और ज़िम्मेदारी छोड़िए, मानवीय संवेदना तक नहीं है क्या सरकार?

दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र हैं हम। बचपन से स्कूल में, किताबों में, राजनेताओं के अभिभाषणों में, घरों में यह...

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बिना संसद में चर्चा के पास होते विधेयक (बिल), विपक्ष का क्या काम फिर संसद में?

भारत के संविधान का अनुच्छेद 107, जो कि संसद में पारित होने वाले बिल (विधेयक) के बारे में है, कहता...

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क्या उत्तर प्रदेश में बदलाव की राजनीति का चेहरा बन रही हैं प्रियंका गाँधी ?

अपनी संवेदनशीलता और जिजीविषा से अगर किसी नेता ने सरकार, विरोधियों और उत्तर प्रदेश के आम जनमानस का ध्यान अपनी...

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कतार में मरता हुआ जनतंत्र का ‘जन’, हमेशा की तरह ‘तंत्र’ सो रहा है!

कतार में उड़ने वाला पंछी ‘कूंज’, जो सर्दियों में अपनी पूरी कतार के साथ खाने,पीने और रहने के लिए हिंदुस्तान...

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‘सावरकर-महात्मा गाँधी’ विवाद से भाजपा को क्या हासिल हो रहा है?

केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री राजनाथ सिंह ने सावरकर पर एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहा कि “सावरकर के...

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